बुधवार, 14 जनवरी 2026

मकर संक्रांति पर बच्चों के नाम

 प्यारे बच्चों !

तुम सबको मकर संक्रांति अर्थात स्नान युध्द विजय पर्व पर ढेर सारा स्नेह ।जो जो स्नान के द्वारा  इस प्रबल ठंड व बर्फीले पानी को आज मात दे चुके हैं ,उन्हें हार्दिक बधाई ; जो जो इस विकट युद्ध में उतरने की तैयारी कर रहे हैं उन्हें शुभ कामना और जो ठंड के डर से उत्साह रुपी हथियार डाल दिए हैं उन्हें हनुमान जी की तरह याद दिलाया जाता है कि वे स्नान युद्ध में विजय पाने हेतु ही बनें हैं ।फिर भी ऐसे ऐसे बीर हमारे बीच हैं जो वर्ष में केवल एक बार आज के दिन नहा लेते हैं ,उन्हें आज सौ बार प्रणाम और उन भीष्म प्रतिज्ञा वालों को जो आज भी नहीं नहाते उन्हें हजार बार  क्योंकि गोस्वामी तुलसी दास जी भी रामचारित मानस (रामायण )की रचना के आरंभ में ही कुछ ऐसे ही कारण हेतु माननीय दुष्ट जनों की वंदना किए थे । 

ऐसे वैसे या कैसे भी जो विजयी हो गए हैं,उन्हें सूर्यदेव को नमन करने ,सूखी या पकी खिचड़ी दान करने के बाद  खिचड़ी-  पापड़-चोखा,तिलवा, ढुंडा ,मुग्दल ,दही-चिउड़ा इत्यादि का पूरा पूरा आनंद उठाने का आमंत्रण है । यदि बंधु- बांधव और इष्ट मित्रों के साथ इन ब्यंजनों का आनंद उठा पाएँ तो यही इस युध्द विजय का प्रथम पारितोषिक है ।

फिर क्या ; अब खुली धूप में पतंग उड़ाने  या दूसरों को उड़ाते हुए देखने का यतन करिए और मौज मस्ती भरिए । इतने बढ़िया त्योहार पर यह अवश्य याद रखिए कि पतंगबाजी एक अच्छा शौक है परंतु चीनी मंझा का प्रयोग एक घृणित अपराध है ।ए मंझे प्रति वर्ष अनगिनत पशु-पक्षियों व इंसानों की जान ले रहे हैं ।अत: आज यह भी प्रण करें कि हम पतंग उड़ाने में केवल देशी मंझा ही प्रयोग करेंगे ।

मजे की बात यह है कि सूर्यदेव हम सबको ठंढ से छुट्टी दिलाने के लिए ही प्रति वर्ष 14/15 जनवरी को मकर रेखा पार कर उत्तरायण होते हैं जिससे दिन के बाद दिन क्रमशः बड़ा होने लगता है और ठंड भागने लगती है ।अत:है न यह बढ़िया ,मीठा और प्यारा -प्यारा हमारा सनातनी  त्यौहार। हँसो, हँसाओ और खुश रहो ।शुभाशिष। जय श्रीराधाकृष्ण। -----मंगलवीणा

मकर संक्रांति ;15 जनवरी 2026,

वाराणसी ।